Sanskrit Proverbs on Foolishness

Learn Sanskrit Proverbs on Foolishness along with transliteration, English, and Hindi meaning for easy understanding.

Subhashitas are short, well-known sayings which state a general truth or piece of advice.

They have a deep meaning for all of us to learn and implement in our lives.

Proverbs on Foolishness in Sanskrit
Proverb | सुभाषितम् - 1

सम्पूर्णकुम्भो न करोति शब्दम् अर्धो घटो घोषमुपैति नूनम्।
विद्वान् कुलीनो न करोति गर्वं गुणैर्विहीनः बहु जल्पयन्ति॥

Transliteration
saṃpūrṇakumbho na karoti śabdam ardho ghaṭo ghoṣamupaiti nūnam।
vidvān kulīno na karoti garvam guṇairvihīnaḥ bahu jalpayanti॥

Meaning in English
A completely filled pitcher does not make any sound. Whereas, a half-filled pitcher always makes sound. Likewise learned & noble people never pride on their achievements. Whereas, foolish people without good qualities or virtues boast about themselves.

भावार्थ
पूरा भरा हुआ घडा कभी आवाज नहीं करता लेकिन आधा भरा हुआ घडा हमेशा आवाज करता है। जैसे विद्वान और कुलीन व्यक्ति कभी अपनी उपलब्धियों पर गर्व नहीं करते और गुणहीन, मूर्ख व्यक्ति हमेशा गर्व करते हैं॥

Proverb | सुभाषितम् - 2

नमन्ति फलिनो वृक्षाः नमन्ति गुणिनो जनाः। 
शुष्क काष्ठश्च मूर्खश्च न नमन्ति कदाचन॥

Transliteration
namanti phalino vṛkṣāḥ namanti guṇino janāḥ। 
śuṣka kāṣṭhaśca mūrkhaśca na namanti kadācana॥

Meaning in English
(The branch of) A tree with lots of fruit bends down (towards the Earth). Virtuous people bow down (are polite), but a dry piece of wood does not bend nor does a foolish person.

भावार्थ
फल से लदे हुए वृक्ष (जमीन की ओर) झुक जाते हैं। गुणी लोग विनम्र होते हैं। परंतु सूखी लकडी और मूर्ख लोग कभी झुकते नहीं हैं।

Proverb | सुभाषितम् - 3

उपदेशो हि मूर्खाणां प्रकोपाय न शान्तये।
पयः पानं भुजङ्गानां केवलं विषवर्धनम्॥ 

Transliteration
upadeśo hi mūrkhāṇām prakopāya na śāntaye।
payaḥ pānam bhujaṅgānām kevalam viṣavarthanam॥

Meaning in English
One must never give advise to foolish people, as it angers them instead of calming them. It is the same as feeding milk to a serpent which will lead to increase in its venom.

भावार्थ
मूर्ख को उपदेश करेंगे (सलाह देंगे) तो वह गुस्सा हो जाता है, शांत नही होता। साँप को दूध पिलाना, उसका विष बढाने जैसा है।

Proverb | सुभाषितम् - 4

पृथिव्याम् त्रीणि रत्नानि जलमन्नम् सुभाषितम्।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसञ्ज्ञा प्रदीयते॥

Transliteration
pṛthivyām trīṇi ratnāni jalamannam subhāṣitam।
mūḍhaiḥ pāṣāṇakhaṇḍeṣu ratnasañjñā pradīyate॥

Meaning in English
There are three jewels on the earth – water, food & good words. However fools regard pieces of rocks as jewels.

भावार्थ
पृथ्वी पर तीन ही रत्न है – जल, अन्न और अच्छे वचन। परंतु मूर्ख लोग पत्थर के टुकडे को रत्न कहते हैं।

Proverb | सुभाषितम् - 5

मूर्खस्य पञ्च चिन्हानि गर्वो दुर्वचनं तथा।
क्रोधश्च दृढवादश्च परवाक्येष्वनादरः॥

Transliteration
mūrkhasya pañca cinhāni garvo durvacanaṃ tathā।
krodhaśca dṛḍhavādaśca paravākyeṣvanādaraḥ॥

Meaning in English
Five signs of a foolish person are…Vanity, Being abusive, Anger for no reason, baseless arguments &  lack of respect for others’ opinion.

भावार्थ
मूर्ख व्यक्ति के पाँच लक्षण है- गर्व करना, अपशब्द बोलना, क्रोध, अपनी गलत बात पर दृढ़ रहना और दूसरों की बातों का अनादर।

Proverb | सुभाषितम् - 6

दुर्बलस्य बलम् राजा बालानां रोदनं बलम्।
बलम् मूर्खस्य मौनित्वं चौराणामनृतं बलम्॥

Transliteration
durbalasya balam rājā bālānāṃ rodanaṃ balam।
balam mūrkhasya maunitvaṃ caurāṇāmanṛtaṃ balam॥

Meaning in English
The king is the strength of a weak person. Crying is the strength of a child. Keeping mum is the strength of a foolish person. Lying is the strength of a thief.

भावार्थ
दुर्बलों का बल राजा है। बच्चों का बल रोदन (रोना) है। मूर्खों का बल मौन रखना है। चोरों का बल असत्य है।

Proverb | सुभाषितम् - 7

येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः।
ते मर्त्यलोके भुवि भारभूताः मनुष्यरुपेण मृगाश्चरन्ति॥

Transliteration
yeṣāṃ na vidyā na tapo na dānaṃ jñānaṃ na śīlaṃ na guṇo na dharmaḥ।
te martyaloke bhuvi bhārabhūtāḥ manuṣyarupeṇa mṛgāścaranti॥

Meaning in English
Those who do not have knowledge, penance, good conduct, virtue or observance of duties, pass their life in this world of mortals like beasts in human form and are a burden on the planet.

भावार्थ
जिन लोगों के पास विद्या, तप, दान, शील, गुण और धर्म नहीं होता, ऐसे लोग धरती के लिए भार / बोझ हैं। ऐसे लोग मनुष्य के रुप में विचरण करने वाले ( घूमने वाले ) पशु हैं ।

Proverb | सुभाषितम् - 8

आलसस्य कुतो विद्या अविद्यस्य कुतो धनम्।
अधनस्य कुतो मित्रं अमित्रस्य कुतः सुखम्॥

Transliteration
ālasasya kuto vidyā avidyasya kuto dhanam।
adhanasya kuto mitraṃ amitrasya kutaḥ sukham॥

Meaning in English
How can a lazy person gain knowledge? Without knowledge, how will one get wealth? Without wealth, how will one have friends? Without friends, how will one be happy?

भावार्थ
जो आलस करते हैं, उन्हें विद्या कैसे मिलेगी? जिनके पास विद्या नहीं, उनको धन कैसे मिलेगा? जो निर्धन हैं, उनको मित्र कैसे मिलेंगे? (और) मित्र के बिना सुख कैसे मिलेगा?

Proverb | सुभाषितम् - 9

यत्र विद्वज्जनो नास्ति श्लाघ्यः तत्र अल्पधीः अपि।
निरस्तपादपे देशे एरण्डोऽपि द्रुमायते।

Transliteration
yatra vidvajjano nāsti ślāghyaḥ tatra alpadhīḥ api।
nirastapādape deśe eraṇḍo’pi drumāyate।

Meaning in English
In a place where there are no knowledgeable people, a dim-witted person gets praised. In a place where there are no trees, a castor plant is considered as a tree.

भावार्थ
जहाँ विद्वान लोग नहीं होते वहाँ अल्पबुद्धी मूर्ख की भी तारीफ होती है। उसे विद्वान समझते है। जहाँ कुछ भी बड़े वृक्ष नहीं है वहाँ एरंड को भी बड़ा वृक्ष मानते है।

Proverb | सुभाषितम् - 10

यथा खरः चन्दनभारवाही भारस्य वेत्ता न तु चन्दनस्य।
एवं हि शास्त्राणि बहूनि अधीत्य अर्थेषु मूढाः खरवद् वहन्ति॥

Transliteration
yathā kharaḥ candanabhāravāhī bhārasya vettā na tu candanasya।
evaṃ hi śāstrāṇi bahūni adhītya artheṣu mūḍhāḥ kharavad vahanti॥

Meaning in English
The way a donkey carrying sandalwood does not understand the value of what it is carrying, similarly many foolish people who read scriptures do not understand its meaning and do not learn anything. They just carry the baggage of learning these scriptures.

भावार्थ
जैसे चंदन का बोझ़ उठानेवाला गधा बोझ़ तो उठाता है लेकिन चंदन का मूल्य नहीं समझता। वैसे ही मूर्ख लोग बहुत से शास्त्रों को पढ़ लेते है, लेकिन उनका अर्थ नहीं समझते, सच्चा ज्ञान नहीं पाते। शास्त्रों का केवल बोझ़ उठाते है।

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