Sanskrit Proverbs on Virtue

Subhashitas on Virtues

Sanskrit Proverbs i.e. Subhashitas are short, well-known sayings which state a general truth or piece of advice. Sanskrit Proverbs on Virtues are listed here. These have been taken from ancient Indian texts written by many learned Rishis and Gurus.

उद्यमः, साहसं, धैर्यं, बुद्धिः, शक्तिः, पराक्रमः।
षड् एते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायकृत्॥

Transliteration
udyamaḥ, sāhasaṃ, dhairyaṃ, buddhiḥ, śaktiḥ, parākramaḥ।
ṣaḍ ete yatra vartante tatra devaḥ sahāyakṛt॥

Meaning in English
When the following virtues i.e. Perseverance, Courage, Patience, Intelligence, Strength, and Valour  are present in a person, even god becomes helpful (God helps that person)

भावार्थ
उद्योग, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति, और पराक्रम ये छः गुण जहाँ ( जिस व्यक्ति ) में होते हैं , ईश्वर उसकी सहायता करते हैं ।

नरस्याभरणं रूपं रूपस्याभरणं गुणः।
गुणस्याभरणं ज्ञानं ज्ञानस्याभरणं क्षमा॥

Transliteration
narasyābharaṇaṃ rūpaṃ rūpasyābharaṇaṃ guṇaḥ।
guṇasyābharaṇaṃ jñānaṃ jñānasyābharaṇaṃ kṣamā॥

Meaning in English
Beauty is the ornament of a Human, Virtues are the ornaments of Beauty , Knowledge is the ornament of Virtue, Forgiveness is the ornament of Knowledge.

भावार्थ
मनुष्य का आभूषण उसका रूप होता है, रूप का आभूषण गुण, गुण का आभूषण ज्ञान होता है , ज्ञान का आभूषण क्षमा होता है।

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात्, न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयात्, एषः धर्मः सनातनः॥

Transliteration
satyaṃ brūyāt priyaṃ brūyāt, na brūyāt satyam apriyam।
priyaṃ ca nānṛtaṃ brūyāt, eṣaḥ dharmaḥ sanātanaḥ॥

Meaning in English
Speak the truth that is pleasant to others, Never speak the truth which is unpleasant to others, Never speak untruth which might be pleasant, This is the path of Sanatan Dharma.

भावार्थ
सत्य बोलना चाहिये , प्रिय बोलना चाहिये , सत्य परंतु अप्रिय नहीं बोलना चाहिये और प्रिय परंतु असत्य नहीं बोलना चाहिये , यही सनातन धर्म है ।

षड्दोषाः पुरूषेण इह हातव्या भूतिमिच्छिता।
निद्रा, तन्द्रा, भयं, क्रोधः, आलस्यं, दीर्घसूत्रता॥

Transliteration
ṣaḍdoṣāḥ purūṣeṇa iha hātavyā bhūtimicchitā।
nidrā, tandrā, bhayaṃ, krodhaḥ, ālasyaṃ, dīrghasūtratā॥

Meaning in English
Excessive sleep, Fatigue, Fearfulness, Anger, Laziness and Procrastination are the six vices that need to be renounced by those who desire their prosperity.

भावार्थ
उन्नति की कामना करनेवाले ने निद्रा, तन्द्रा, भय, क्रोध, आलस्य और दीर्घसूत्रता (काम टालने की वृत्ति) का त्याग करना चाहिए ।

हस्तस्य भूषणं दानं, सत्यं कण्ठस्य भूषणम्।
श्रोत्रस्य भूषणं शास्त्रं, भूषणैः किं प्रयोजनम्॥

Transliteration
hastasya bhūṣaṇaṃ dānaṃ, satyaṃ kaṇṭhasya bhūṣaṇam।
śrotrasya bhūṣaṇaṃ śāstraṃ, bhūṣaṇaiḥ kiṃ prayojanam॥

Meaning in English
The ornament of hands is giving donations (charity), 
The ornament of neck & throat is speaking the truth,
The ornament of ears is listening to various disciplines & knowledge,
If the person is endowed with these virtues, where is the need for artificial ornaments?

भावार्थ
हाथ का गहना दान करना है, कंठ का गहना सच बोलना और कान का गहना धर्मशास्त्र ( अच्छी बातें सुनना) है, फिर उस मनुष्य को अन्य गहनों की क्या आवश्यकता ?

यथा चित्तं तथा वाचा यथा वाचा तथा क्रिया।
चित्ते वाचि क्रियायां च साधूनाम् एकरूपता॥

Transliteration
yathā cittaṃ tathā vācā yathā vācā tathā kriyā।
citte vāci kriyāyāṃ ca sādhūnām ekarūpatā॥

Meaning in English
As is the mind, so is the speech, as is the speech, so is the action;
There is uniformity in thought, speech and act of virtuous people.

भावार्थ
अच्छे लोग (सज्जन) जो सोचते हैं वही बोलते हैं, जो बोलते हैं वही करते हैं।
ऐसे सज्जन लोगों के मन, वचन और कर्म में समानता होती है।

शैले शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे।
साधवो न हि सर्वत्र चन्दनं न वने वने॥

Transliteration
śaile śaile na māṇikyaṃ mauktikaṃ na gaje gaje।
sādhavo na hi sarvatra candanaṃ na vane vane॥

Meaning in English
Gems & precious stones are not found in every mountain, not every elephant has a pearl on its forehead.
Similarly, noble & virtuous people are not found everywhere and sandalwood trees are not found or grown in all forests.

भावार्थ
हर एक पर्वत पर माणिक नहीं मिलते, हर एक हाथी के मस्तक से मुक्तामणि नहीं मिलता, (संसार में) सभी जगह सज्जन लोग नहीं मिलते, (उसी प्रकार) चंदन के वृक्ष हर एक वन में उपलब्ध नहीं होते।

अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम्।
परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनाम्॥

Transliteration
aṣṭādaśa purāṇeṣu vyāsasya vacanadvayam।
paropakāraḥ puṇyāya pāpāya parapīḍanām॥

Meaning in English
In all the 18 Puranas, two messages of Maharshi Vyas are very important. First – Doing favour to others is saintly and second – giving trouble to others is a sin.

भावार्थ
सभी १८ पुराणों में महर्षि व्यास के दो वचन महत्त्वपूर्ण हैं। पहला- दूसरों का भला करना पुण्य है। दूसरा- दूसरों को दुःख देना पाप है।