Fox and the Grapes Sanskrit Story
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Video of Fox and the Grapes Sanskrit Story
अम्लानि द्राक्षाफलानि
एकस्मिन् वने एका शृगाली वसति स्म।
एकदा सा पिपासिता क्षुधिता च आसीत्।
वने सा द्राक्षालताम् अपश्यत्।
तत्र नैकानि पक्वानि द्राक्षाफलानि आसन्।
तानि दृष्ट्वा तस्याः बुभुक्षा अवर्धत।
द्राक्षाफलानि खादितुं सा पुनः पुनः उत्पतितवती।
परन्तु सा द्राक्षाफलानि न प्राप्तवती।
अन्ते शृगाली श्रान्ता खिन्ना च अभवत्।
तदा सा अवदत्, “अम्लं द्राक्षाफलम्, अम्लं द्राक्षाफलम्।” इति।
इति उक्त्वा शृगाली ततः प्रस्थिता।
तात्पर्यम् – यत् न प्राप्यते, तत् निन्दितुं न उचितम्।
Fox and the Grapes
Once upon a time, a fox lived in a forest.
One day, she was thirsty and hungry.
In the forest, she saw a grapevine.
There were many ripe grapes on it.
Seeing them, her hunger increased.
She jumped again and again to eat the grapes.
But she could not reach the grapes.
At last, the fox became tired and sad.
Then she said, “The grapes are sour, the grapes are sour.”
Saying this, the fox went away.
Moral: It is not right to criticize something that we cannot get.
लोमड़ी और खट्टे अंगूर की कहानी
एक जंगल में एक लोमडी रहती थी।
एक बार् वह प्यासी और भूखी थी।
जंगल में उसने अंगूर की एक बेल देखी।
वहाँ बहुत सारे पके हुए अंगूर थे।
उन्हें देखकर उसकी भूख बढ़ गई।
अंगूर खाने के लिए वह बार-बार उछलने लगी।
लेकिन वह अंगूर नहीं प्राप्त कर पाई।
अंत में लोमड़ी थक गई और उदास हो गई।
अंत में उसने कहा, “अंगूर खट्टे हैं, अंगूर खट्टे हैं।”
ऐसा कहकर लोमड़ी वहाँ से चली गई।
तात्पर्य: जो चीज़ हमें नहीं मिलती, उसकी बुराई नहीं करनी चाहिए।