Hare and Tortoise Sanskrit Story
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Video of Hare and Tortoise Sanskrit Story
शशकः कच्छपः च
एकः शशकः आसीत्।
एकः कच्छपः अपि आसीत्।
शशकः अतीव शीघ्रं धावति स्म।
परन्तु कच्छपः अतीव मन्दः आसीत्।
शशकः कच्छपम् अकथयत्, “त्वं बहुमन्दः असि।”
तर्हि कच्छपः अवदत्, “स्पर्धां करवाव”।
स्पर्धायां, शशकः शीघ्रम् अधावत् परन्तु श्रान्तः अभवत्।
तर्हि सः स्पर्धायाः मध्ये अस्वपत्।
कच्छपः विरामं विना शनैः शनैः अग्रे अगच्छत्।
कच्छपः प्रथमः भूत्वा स्पर्धायाम् अजयत्।
नीतिः – मन्दः परं स्थिरः स्पर्धायां जयति।
Hare and Tortoise
There was a rabbit
There was a tortoise too.
The rabbit used to run very fast.
But the tortoise was very slow.
The rabbit said to the tortoise, “You are very slow.”
The tortoise then said, “Let us have a race.”
In the race, the rabbit ran fast but got tired.
So he slept in the middle of the race.
The tortoise kept going without a break.
The tortoise finished first and won the race.
Moral: Slow but study wins the race.
चतुर कौआ की कहानी
एक खरगोश था।
एक कछुआ भी था।
खरगोश बहुत तेज दौड़ता था।
लेकिन कछुआ बहुत धीरे चलता था।
खरगोश ने कछुए से कहा, “तुम बहुत धीमे हो।”
तब कछुए ने कहा, “ हम दोनों एक दौड़ लगाते हैं।”
दौड़ में खरगोश बहुत तेज दौड़ा, लेकिन वह थक गया।
इसलिए वह दौड़ के बीच में सो गया।
कछुआ बिना रुके धीरे-धीरे आगे गया।
कछुआ सबसे पहले अंतिम स्थान पर पहुँचा और दौड़ जीत गया।
नीति = धीमी लेकिन निरंतर गति से चलने वाला सफलता प्राप्त करता है।