Essay on Books My Friend in Sanskrit

This post is an essay on Books My Friend in Sanskrit. पुस्तक - मेरी दोस्त पर संस्कृत निबंध

Transliteration, meaning in English and Hindi translation is also given for better understanding.

This essay can be referenced by school students and Sanskrit learners.

Sanskrit Essay on Books my Friend

पुस्तकं मम मित्रम्।

पुस्तकं मम मित्रम् अस्ति। तत् प्रतिक्षणं मम सहायतां करोति।

पुस्तकं मह्यं बहु ज्ञानं यच्छति। विविधानि पुस्तकानि विविधानां विषयानां ज्ञानं यच्छन्ति। विज्ञानविषयकानि पुस्तकानि मां विज्ञानं पाठयन्ति। गणितविषयकानि पुस्तकानि मां गणितं पाठयन्ति। कथापुस्तकानि कथाभिः शिक्षां यच्छन्ति। पुस्तकानि जीवनमूल्यानि पाठयन्ति।

पुस्तकं मनोरञ्जनम् अपि करोति। कथाः पठित्वा कल्पनाशक्तिः वर्धते। कादम्बर्यः कल्पनाविश्वं दर्शयन्ति।

पुस्तकं तु सर्वत्र एव अस्ति। तत् गृहेषु, विद्यालयेषु आपणेषु ‍च वसति। पुस्तकालयेषु तस्य विशेषं स्थानम् अस्ति। तत्र सर्वे पठितुम् आगच्छन्ति।

अहं पुस्तकेन सह मित्रवत् व्यवहरामि। प्रतिदिनम्, अहं दैनन्दिन्यां दिनस्य अनुभवान् लिखामि।

मह्यं पुस्तकम् अतीव रोचते।

पुस्तकेन सह सद्‍व्यवहारस्य विषये इदम् एकं रम्यं सुभाषितम् –

तैलाद्रक्षेत् जलाद्रक्षेत् रक्षेत्शिथिलबन्धनात्।
मूर्खहस्ते न दातव्यमेवं वदति पुस्तकम्॥

pustakaṃ mama mitram।

pustakaṃ mama mitram asti। tat pratikṣaṇaṃ mama sahāyatāṃ karoti।

pustakaṃ mahyaṃ bahu jñānaṃ yacchati। vividhāni pustakāni vividhānāṃ viṣayānāṃ jñānaṃ yacchanti। vijñānaviṣayakāni pustakāni māṃ vijñānaṃ pāṭhayanti। gaṇitaviṣayakāni pustakāni māṃ gaṇitaṃ pāṭhayanti। kathāpustakāni kathābhiḥ śikṣāṃ yacchanti। pustakāni jīvanamūlyāni pāṭhayanti।

pustakaṃ manorañjanam api karoti। kathāḥ paṭhitvā kalpanāśaktiḥ vardhate। kādambaryaḥ kalpanāviśvaṃ darśayanti।

pustakaṃ tu sarvatra eva asti। tat gṛheṣu, vidyālayeṣu āpaṇeṣu ‍ca vasati। pustakālayeṣu tasya viśeṣaṃ sthānam asti। tatra sarve paṭhitum āgacchanti।

ahaṃ pustakena saha mitravat vyavaharāmi। pratidinam, ahaṃ dainandinyāṃ dinasya anubhavān likhāmi।

mahyaṃ pustakam atīva rocate।

pustakena saha sad‍vyavahārasya viṣaye idam ekaṃ ramyaṃ subhāṣitam –

tailādrakṣet jalādrakṣet rakṣetśithilabandhanāt।
mūrkhahaste na dātavyamevaṃ vadati pustakam॥

Essay on Books My Friend

Books are my friend. They always help me.

I get a lot of knowledge from books. Books of various subjects give knowledge about various topics. Books about science teach me about science. Books about Mathematics teach me about maths. Storybooks teach us morals with stories. Books also teach us about life values.

Books also entertain us. Reading stories increases our imagination. Novels take us to the world of fiction.

Books are everywhere. They are in homes, schools and in shops. They have a special place in libraries. Everybody goes here to read.

I behave with books like a friend. Everyday, I write my experiences and feelings of the day in my diary.

I like books very much.

This is an enjoyable Subhashita about proper handling of books.

“Protect me from being spoiled by oil & water, protect me from loose binding and do not give me in the hands of a foolish person,” this is what a book says.

पुस्तक - मेरी दोस्त पर निबंध

पुस्तक मेरी दोस्त है। वह हमेशा मेरी मदद करती है।

मुझे पुस्तक से बहुत ज्ञान मिलता है। विभिन्न विषयों की पुस्तकें विभिन्न विषयों का ज्ञान देती है। विज्ञान की पुस्तक मुझे विज्ञान के बारे में सिखाती हैं। गणित की पुस्तक मुझे गणित के बारे में सिखाती हैं। कहानियों की पुस्तक हमें कहानियों के साथ नैतिकता सिखाती है। पुस्तक हमें जीवन मूल्यों के बारे में भी सिखाती है।

पुस्तक हमारा मनोरंजन भी करती है। कहानियाँ पढ़ने से हमारी कल्पना शक्ति बढ़ती है। कादंबरियाँ हमें कल्पना की दुनिया में ले जाती हैं।

पुस्तक हर जगह होती है। वह घर, विद्यालय और दुकानों में रहती है। पुस्तकालयों में इसका विशेष स्थान है। यहाँ सब पुस्तक पढ़ने आते हैं।

मैं पुस्तक के साथ एक दोस्त की तरह व्यवहार करता हूँ। मैं रोज अपने अनुभव और दिन की भावनाओं को अपनी डायरी में लिखता हूँ।

मुझे पुस्तक बहुत पसंद है।

पुस्तकों के साथ सद्‍व्यवहार के बारे में यह एक रम्य सुभाषित है –

पुस्तक कहती है, कि तेल से (उसकी) रक्षा करें, जल से रक्षा करें, शिथिल बंधन से रक्षा करें और किसी मूर्ख व्यक्ति के हाथ में (उसे) न दें।

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