Essay on Importance of Water in Sanskrit

This is an essay on "Importance of Water" in Sanskrit.

Transliteration, meaning in English and Hindi translation is also given for better understanding.

This essay can be referenced by school students and Sanskrit learners.

Essay on Importance of Water in Sanskrit

जलस्य महत्त्वम्।

जलम् एव जीवनम्। पृथिव्यां ७०% जलम् अस्ति। जलेन एव सर्वजीवानां जीवनं सम्भवति। संस्कृते जलस्य बहूनि नामानि सन्ति। यथा – उदकं, नीरं, वारि तथा च तोयम्।

वयं शुद्धं जलं केवलं वर्षायाः विन्दामः। एतत् जलं नदीषु, तडागेषु, सरोवरेषु च एकत्रितं भवति। एतत् जलम् अस्माकं क्षेत्राणि उद्यानानि च सिञ्चति। नदीनां जले जलजीवाः जीवन्ति। नदीनां तीरेषु नैकानि नगराणि वर्तन्ते।

जलस्य उपयोगं तु सर्वत्रैव भवति। जलेन तृष्णायाः निवारणं भवति। जलस्य पानेन शीतलता अनुभूयते, उत्साहः च वर्धते। पानाय​, भोजननिर्माणाय, भोजनाय च जलस्य आवश्यकता अस्ति। स्नानाय​, वस्त्रप्रक्षालनाय​, गृहस्वच्छतायै च जलम् उपयुज्यते। नगरस्वच्छतायै, उद्योगेभ्यः, पशुपालनाय च जलस्य आवश्यकता अस्ति।

जनाः जले वस्त्राणि तथा च पात्राणि क्षालयन्ति। अनेन जलं दूषितं भवति। दूषितजलस्य कारणात् हानिः भवति। दूषितेन जलेन क्षेत्राणि शुष्यन्ति, जीवाः च नष्टाः भवन्ति। दूषितजलस्य प्रभावेण बहवः रोगाः समुद्भवन्ति। यथा – ज्वरः, अतिसारः च​। अतः अयम् अस्माकं धर्मः, यत् अस्माभिः जलसंरक्षणं, तस्य संवर्धनं च करणीये।

“२२ मार्च” इति दिनाङ्के विश्वजलदिवसः भवति।

jalasya mahattvam।

jalam eva jīvanam। pṛthivyāṃ 70% jalam asti। jalena eva sarvajīvānāṃ jīvanaṃ sambhavati। saṃskṛte jalasya bahūni nāmāni santi। yathā – udakaṃ, nīraṃ, vāri tathā ca toyam।

vayaṃ śuddhaṃ jalaṃ kevalaṃ varṣāyāḥ vindāmaḥ। etat jalaṃ nadīṣu, taḍāgeṣu, sarovareṣu ca ekatritaṃ bhavati। etat jalam asmākaṃ kṣetrāṇi udyānāni ca siñcati। nadīnāṃ jale jalajīvāḥ jīvanti। nadīnāṃ tīreṣu naikāni nagarāṇi vartante।

jalasya upayogaṃ tu sarvatraiva bhavati। jalena tṛṣṇāyāḥ nivāraṇaṃ bhavati। jalasya pānena śītalatā anubhūyate, utsāhaḥ ca vardhate। pānāya​, bhojananirmāṇāya, bhojanāya ca jalasya āvaśyakatā asti। snānāya​, vastraprakṣālanāya​, gṛhasvacchatāyai ca jalam upayujyate। nagarasvacchatāyai, udyogebhyaḥ, paśupālanāya ca jalasya āvaśyakatā asti।

janāḥ jale vastrāṇi tathā ca pātrāṇi kṣālayanti। anena jalaṃ dūṣitaṃ bhavati। dūṣitajalasya kāraṇāt hāniḥ bhavati। dūṣitena jalena kṣetrāṇi śuṣyanti, jīvāḥ ca naṣṭāḥ bhavanti। dūṣitajalasya prabhāveṇa bahavaḥ rogāḥ samudbhavanti। yathā – jvaraḥ, atisāraḥ ca​। ataḥ ayam asmākaṃ dharmaḥ, yat asmābhiḥ jalasaṃrakṣaṇaṃ, tasya saṃvardhanaṃ ca karaṇīye।

“22 mārca” iti dināṅke viśvajaladivasaḥ bhavati।

Essay on Importance of Water

Water is life. The Earth consists of 70% water. There are many names for water in Sanskrit. E.g. – Udaka, Neera, Vaari and Toya.

We get pure water only from rain. This water get collected in rivers, ponds and lakes. We use this water to irrigate our fields and gardens. Various animals live in rivers. Major settlements also are formed on the banks of rivers.

Water is used almost everywhere. By drinking water, we can quench our thirst. By drinking water, we feel cool and we get energetic. Water is used for drinking​ and making food. Water is also used for bathing, washing clothes and keeping the house clean. Water is also important for keeping the town or city clean, for various industries and for taking care of animals.

People wash their clothes and utensils in water. As a result, the water gets polluted. Many problems are caused due to polluted water. Due to polluted water, fields become infertile and many lives are harmed. Many diseases are also caused due to polluted water. E.g. – Fever and loose motions. Therefore, it is our responsibility to protect water and ensure that is not polluted.

World Water Day is celebrated on 22 March every year.

पानी का महत्त्व पर निबंध

जल ही जीवन है। पृथ्वी में 70% पानी है। पानि से ही सारे जीवों जीवन संभव है। संस्कृत में पानी के बहुत नाम हैं। जैसे – उदक, नीर, वारि और तोय।

हमें शुद्ध पानी केवल बारिश से मिलता है। यह पानी नदीयों में, तालाबों में और सरोवरों में इकट्ठा होता है। यह पानी हमारे खेत और बगीचों का सिञ्चन करता है। नदीयों के पानी में जलजीव रहते हैं। नदीयों के तीरों पर प्रमुख नगर हैं।

पानी का उपयोग सभी जगह होता है। पानी से प्यास का निवारण हो जाता है। पानी पीने से हम शीतलता अनुभव करते हैं और उत्साह भी बढ़ता है। पीने के लिए, भोजन के निर्माण के लिए और भोजन के लिए पानी की आवश्यकता है। स्नान के लिए​, कपड़े धोने के लिए और घर स्वच्छ रखने के लिए पानी का उपयोग किया जाता है। नगर की स्वच्छता के लिए, उद्योग के लिए और पशुपालन के लिए पानी की आवश्यकता है।

लोग पानी में कपड़े और बर्तन धोते हैं। इससे पानी प्रदूषित होता है। प्रदूषित पानी के कारण हानि होती है। प्रदूषित पानी से खेत सूख जाते हैं और जीव नष्ट हो जाते हैं। प्रदूषित पानी के प्रभाव से बहुत रोग होते हैं। जैसे – बुखार और अतिसार। अतः हमारा कर्तव्य है कि हमे पानी का संरक्षण और उसका संवर्धन करना चाहिए।

२२ मार्च इस दिन पर विश्व जल दिवस मनाया जाता है।

Sanskrit Essays | संस्कृत निबंध संग्रह

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