Essay on Lion in Sanskrit

This is an essay on Lion in Sanskrit.

Transliteration, meaning in English and Hindi translation are given for better understanding.

This short Essay on Lion in Sanskrit can be referenced by school students and Sanskrit learners.

Essay on lion in Sanskrit

सिंहः।

सिंहः पशूनां राजा अस्ति। सः वने वसति। सः दुर्गादेव्याः प्रियः।

वनराजः, मृगेन्द्रः, केसरी इति तस्य​ नामानि। सिंहः मार्जारस्य व्याघ्रस्य च सजातीयः अस्ति। तस्य केसराः तस्य वैशिष्ट्यम्। सिंहस्य शिरसि कण्ठे च केसराः सन्ति। तस्मात् तस्य “केसरी” इति अपरं नाम​। तस्य चत्वारः सनखाः पादाः, पिङ्गले नेत्रे, विशालं वक्षः च सन्ति। सिंहस्य वर्णः पीतः कपीशः च अस्ति। सः गुहायां वसति। वर्षाकाले मेघगर्जनां श्रुत्वा सः अपि उच्चैः गर्जति।

सिंहः बलिष्ठः बुद्धिमान् च। सः अतीव चपलः पशुः अस्ति। सः सर्वेषु पशुषु शूरतमः। सः एकः स्वाभिमानी पशुः। सिंहः मांसाहारी पशुः। वृद्धः अपि सः कदापि तृणं न खादति। अशक्तः अपि सः परहतं पशुं न स्पृशति। सः अतीव हिंस्त्रः। तस्य दर्शनम् एव मनसि भयम् उत्पादयति।

सिंहविहीनम् वनम् निरर्थकम्। सिंहः वनस्य वैभवम् अस्ति। 

सिंहस्य विषये एकं सुभाषितं वर्तते –

नाभिषेको न संस्कारः सिंहस्य क्रियते वने।
विक्रमार्जितसत्त्वस्य स्वयमेव मृगेन्द्रता॥

siṃhaḥ।

siṃhaḥ paśūnāṃ rājā asti। saḥ vane vasati। saḥ durgādevyāḥ priyaḥ।

vanarājaḥ, mṛgendraḥ, kesarī iti tasya nāmāni। siṃhaḥ mārjārasya vyāghrasya ca sajātīyaḥ asti। tasya kesarāḥ tasya vaiśiṣṭyam। siṃhasya śirasi kaṇṭhe ca kesarāḥ santi। tasmāt tasya “kesarī” iti aparaṃ nāma। tasya catvāraḥ sanakhāḥ pādāḥ, piṅgale netre, viśālaṃ vakṣaḥ ca santi। siṃhasya varṇaḥ pītaḥ kapīśaḥ ca asti। saḥ guhāyāṃ vasati। varṣākāle meghagarjanāṃ śrutvā saḥ api uccaiḥ garjati।

siṃhaḥ baliṣṭhaḥ buddhimān ca। saḥ atīva capalaḥ paśuḥ asti। saḥ sarveṣu paśuṣu śūratamaḥ। saḥ ekaḥ svābhimānī paśuḥ। siṃhaḥ māṃsāhārī paśuḥ। vṛddhaḥ api saḥ kadāpi tṛṇaṃ na khādati। aśaktaḥ api saḥ parahataṃ paśuṃ na spṛśati। saḥ atīva hiṃstraḥ। tasya darśanam eva manasi bhayam utpādayati।

siṃhavihīnam vanam nirarthakam। siṃhaḥ vanasya vaibhavam asti।

siṃhasya viṣaye ekaṃ subhāṣitaṃ vartate – 

nābhiṣeko na saṃskāraḥ siṃhasya kriyate vane।
vikramārjitasattvasya svayameva mṛgendratā॥

Essay on Lion

The lion is the king of animals. It lives in the jungle and is a favourite of Goddess Durga.

The lion has different names such as “King of Jungle” (Vanaraja), etc. It belongs to the feline family. It’s mane is its specialty. The mane of the lion is around the face and neck. This is why the lion is also known as “Kesari”. It has four feet with sharp claws, sharp eyes and  a broad chest. It is yellow and brown in colour. It lives in a cave. During thunderstorms, after hearing the thundering of clouds, the lion also roars in response.

The lion is a strong and intelligent animal. It is a very agile animal. It is the most courageous animal. It is a self-respecting animal. It is also a carnivorous animal. The lion, even if old, does not eat grass. Even if it is  weak, it does not eat the catch of another animal. The lion is very violent and dangerous. Its very sight creates fear in the mind.

A jungle is meaningless without the lion. It is the grandeur of the forest.

There is a Subhashita composed about the lion –
For a lion to become the King of the forest, rituals are not performed. By the power of his might alone, he is considered to be the King of the forest.

शेर पर निबंध

सिंह पशुओं का राजा है। सिंह वन में रहता है। सिंह दुर्गादेवी का प्रिय है।

वनराज, मृगेंद्र, केसरी इत्यादी सिंह के नाम हैं। सिंह, बिल्ली और बाघ के जाती का है। सिंह के केश उसका वैशिष्ट्य है। उसके सिर और गले पर केश होते हैं। इसलिए, “केसरी” सिंह का दूसरा नाम है। उसको चार नखवाले पैर, पिंगल आँखें और विशाल वक्ष होते हैं। सिंह का रंग पीला और भूरा होता है। वह गुहा में रहता है। वर्षा के समय, बादलों का गरजना सुनकर वह भी उच्च स्वर में गर्जना करता है।

सिंह बलिष्ठ और बुद्धिमान होता है। वह बहुत चपल पशु है। वह सारे पशुओं में सबसे शूर पशु है। वह एक स्वाभिमानी पशु है। वह मांसाहारी पशु है। वह वृद्ध होगा फिर भी घास नहीं खाता। वह अशक्त होगा फिर भी दूसरे पशु ने किया हुआ शिकार नहीं खाता। वह बहुत हिंस्त्र पशु है। उसका दर्शन् ही मन में भय निर्माण करता है।

सिंह के बिना वन निरर्थक है। सिंह वन का वैभव है।

सिंह के विषय एक सुभाषित भी है-
वन में सिंह का कोई भी अभिषेक या संस्कार नहीं करता है। केवल अपने पराक्रम और बल पर वह स्वयं पशुओं का राजा बन जाता है।

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