Essay on World Environment Day in Sanskrit

This is an essay on World Environment Day in Sanskrit.

This post can be referenced by school students and Sanskrit learners.

Transliteration, meaning in English and Hindi translation are given for better understanding.

Essay on World Environment Day in Sanskrit

विश्वपर्यावरणदिनम्

विश्वपर्यावरणदिनं प्रतिवर्षं “५ जून्” इति दिने अस्ति। बहुषु देशेषु इदं पर्यावरणदिनम् आयुज्यते। विश्वपर्यावरणदिनस्य हेतुः अस्ति – सर्वान् जनान् पर्यावरणस्य विषये ज्ञापयितुम्।

मानवाः पर्यावरणस्य महत्त्वं न जानन्ति। मनुष्याणां कार्याणां कारणात् पर्यावरणे प्रदूषणस्य महती समस्या अस्ति। प्रदूषणस्य अपि प्रकाराः सन्ति। यथा – जलप्रदूषणं, वायुप्रदूषणं, भूप्रदूषणं ध्वनिप्रदूषणं च​।

एतैः सर्वैः प्रदूषणप्रकारैः जनाः रुग्णाः भवन्ति। प्रदूषितं जलं पीत्वा उदररोगः भवति। वायुप्रदूषणेन श्वासरोगाः भवन्ति। रासायनिक​-उर्वरकाणां कारणात् भूप्रदूषणं भवति। अनन्तरं, यदा तस्याम् एव भूमौ सस्यानाम् उत्पादनं भवति, तदा फलानि तथा च शाकानि खादित्वा नैके रोगाः भवन्ति। ध्वनिप्रदूषणस्य कारणात् श्रवणरोगाः भवन्ति। प्रदूषणस्य कारणात् केवलं जनाः समस्याः अनुभवन्ति इति नास्ति, परं वृक्षाः, पशवः खगाः च सर्वेऽपि समस्याः अनुभवन्ति।

पर्यावरणस्य रक्षणं सर्वेषां जनानां दायित्वम् अस्ति। पर्यावरणस्य प्रदूषणात् रक्षणं कर्तुं शक्यते। पर्यावरणं रक्षयितुं सर्वत्र पादपारोपणं करणीयम्। नदीनां समुद्राणां च जलं निर्मलं कर्तुं सर्वैः जनैः प्रयत्नानि करणीयानि। सर्वेषां जनानां प्रयत्नैः अस्माकं पर्यावरणं शुद्धं भविष्यति।

सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥

इदं शास्त्रवचनं सत्यं कर्तुम् अस्माभिः सर्वैः विश्वपर्यावरणदिनात् प्रारभ्य पर्यावरणस्य रक्षणं करणीयम्।

Transliteration

viśvaparyāvaraṇadinaṃ prativarṣaṃ “5 jūn” iti dine asti। bahuṣu deśeṣu idaṃ paryāvaraṇadinam āyujyate। viśvaparyāvaraṇadinasya hetuḥ asti – sarvān janān paryāvaraṇasya viṣaye jñāpayitum।

mānavāḥ paryāvaraṇasya mahattvaṃ na jānanti। manuṣyāṇāṃ kāryāṇāṃ kāraṇāt paryāvaraṇe pradūṣaṇasya mahatī samasyā asti। pradūṣaṇasya api prakārāḥ santi। yathā – jalapradūṣaṇaṃ, vāyupradūṣaṇaṃ, bhūpradūṣaṇaṃ dhvanipradūṣaṇaṃ ca​।

etaiḥ sarvaiḥ pradūṣaṇaprakāraiḥ janāḥ rugṇāḥ bhavanti। pradūṣitaṃ jalaṃ pītvā udararogaḥ bhavati। vāyupradūṣaṇena śvāsarogāḥ bhavanti। rāsāyanika​-urvarakāṇāṃ kāraṇāt bhūpradūṣaṇaṃ bhavati। anantaraṃ, yadā tasyām eva bhūmau sasyānām utpādanaṃ bhavati, tadā phalāni tathā ca śākāni khāditvā naike rogāḥ bhavanti। dhvanipradūṣaṇasya kāraṇāt śravaṇarogāḥ bhavanti। pradūṣaṇasya kāraṇāt kevalaṃ janāḥ samasyāḥ anubhavanti iti nāsti, paraṃ vṛkṣāḥ, paśavaḥ khagāḥ ca sarve’pi samasyāḥ anubhavanti।

paryāvaraṇasya rakṣaṇaṃ sarveṣāṃ janānāṃ dāyitvam asti। paryāvaraṇasya pradūṣaṇāt rakṣaṇaṃ kartuṃ śakyate। paryāvaraṇaṃ rakṣayituṃ sarvatra pādapāropaṇaṃ karaṇīyam। nadīnāṃ samudrāṇāṃ ca jalaṃ nirmalaṃ kartuṃ sarvaiḥ janaiḥ prayatnāni karaṇīyāni। sarveṣāṃ janānāṃ prayatnaiḥ asmākaṃ paryāvaraṇaṃ śuddhaṃ bhaviṣyati।

sarve bhavantu sukhinaḥ
sarve santu nirāmayāḥ।
sarve bhadrāṇi paśyantu
mā kaścidduḥkhabhāgbhavet॥

idaṃ śāstravacanaṃ satyaṃ kartum asmābhiḥ sarvaiḥ viśvaparyāvaraṇadināt prārabhya paryāvaraṇasya rakṣaṇaṃ karaṇīyam।

Essay on World Environment Day

Every year, the 5th of June is celebrated as World Environment Day. In many countries, World Environment Day is celebrated. The purpose of the World Environment Day is to spread awareness amongst people about environmental problems.

Many people do not know about the importance of the environment. Due to human activities, there is a great problem of pollution in the environment.Pollution also has various types. Like – water pollution, air pollution, land pollution and noise pollution.

All of these kinds of pollution cause diseases. Drinking polluted water causes abdominal diseases. Air pollution causes respiratory diseases. Artificial fertilisers cause land pollution. Later, when crops are grown on the same land, the fruits and vegetables cause diseases after being eaten. Noise pollution causes hearing problems. Because of pollution, not only humans are affected, but trees, animals and birds are also affected.

The protection and care of the environment is everybody’s responsibility. The environment can be protected. To prevent pollution, tree plantation should be done. Everybody should take steps to keep water in the rivers and seas clean. If everyone takes efforts our environment can become pollution-free.

May everybody be happy.
May everybody be free from any illness.
May everybody see auspicious events.
May no one suffer.

To make this “Shastravachana” true, all of us must take efforts, starting from this World Environment Day, to protect our environment.

विश्व पर्यावरण दिवस पर निबंध

5 जून को प्रतिवर्ष विश्व पर्यावरण दिन मनाया जाता है। बहुत सारे देशों में इस पर्यावरण दिन का आयोजन किया जाता है। विश्व पर्यावरण दिन का उद्देश्य है – सारे लोगों को पर्यावरण की समस्याओं के बारे में सूचित करना।

मनुष्यों को पर्यावरण का महत्त्व ज्ञात नहीं है। मनुष्यों के कार्यों की वजह से पर्यावरण में प्रदूषण की बहुत समस्याएँ हैं। प्रदूषण अनेक प्रकार के होते हैं। जैसे – पानी का प्रदूषण, हवा का प्रदूषण, भूमि का प्रदूषण और ध्वनि का प्रदूषण।

इन सारे प्रदूषण के प्रकारों के कारण लोग बीमार पड़ते हैं। प्रदूषित पानी पीकर पेट की बीमारियाँ होती हैं। हवा के प्रदूषण से साँस की बीमारियाँ होती हैं। रासायनिक खतों की वजह से भूमि का प्रदूषण होता है। जब उसी भूमि में फसलों का उत्पादन किया जाता है, तब फल ओर सब्ज़ियों को खाकर अनेक बीमारियाँ होती हैं। ध्वनिप्रदूषण की वजह से सुनने की बीमारियाँ होती हैं। प्रदूषण के कारण केवल लोगों को ही समस्या नहीं होती, परंतु पेड़, पशु और पक्षी, सभी कष्ट होता है।

पर्यावरण के रक्षण करना सभी लोगों का दायित्व है। पर्यावरण का रक्षण किया जा सकता है। पर्यावरण का रक्षण करने के लिए वृक्षारोपण करना चाहिए। नदी और समुद्र का पानी निर्मल रखने के लिए सभी लोगों ने प्रयत्न करने चाहिए। सभी लोगों के प्रयत्न से पर्यावरण शुद्ध हो सकता है।

सभी लोग सुखी हो जाएँ,
सभी लोग रोगमुक्त रहें।
सभी लोग मंगल घटनाएँ देखें,
कोई दुःख का भागी ना बनें।

यह शास्त्रवचन सत्य करने के लिए हम सब लोगों ने विश्व पर्यावरण दिन से प्रारंभ करके पर्यावरण का रक्षण करना चाहिए।

Sanskrit Essays | संस्कृत निबंध संग्रह

Other Interesting Sections

Axioms

Learn about Sanskrit Axioms which is a statement or proposition which is regarded as being established, accepted, or self-evidently true.

Sanskrit Proverbs

Proverbs

Learn about Sanskrit Proverbs which are a short, well-known saying, stating a general truth or piece of advice.

Shlokas

Learn about Shloka or shlokas in Sanskrit which consists of four padas of 8 syllables each, or of two half-verses of 16 syllables each.

guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments